१. आपको कोई अपना मिलें तो उसको नजरअंदाज न करिये बल्कि उस से बात कीजिए क्योंकि हमें ये नहीं मालूम कि हमारी उस से अगली मुलाकत कब होंगी । १. किसी से दूर जाने की कीमत हमें जब समझ में आती है जब हम उस इंसान से मिलना चाहते हैं लेकिन हम उसे मिल नहीं पाते। २. जब हम दर्द में होते हैं तब हमें बिना दर्द में रहने की कीमत समझ में आती हैं। ३. पैंसे की कीमत हमें जब समझ में आती हैं जब हमें कोई वस्तु खरीदनी होती हैं लेंकिन हम उसे केवल इसलिये नहीं खरीदतें क्योंकि हमारे पास उस वस्तु के मुताबिक पैंसे नहीं होते। ४. कुछ भी कहों लेकिन स्कूल के दोस्त की बात ही अलग होती हैं । ५. बस को पकड़ने में जिस जुनून के साथ हम भागते हैं न आगे देखते और न पीछे देखते हैं केवल बस को पकड़ने की कोशिश में लगे रहतें और मन केवल एक ख्याल रखते चाहे कुछ भी हो जाऐ बस तो पकड़ ही लगे,ठीक जीवन में करें तो बेहतर होग। ६. जो मिले उसमें संतुष्ट रहे क्योंकि लोगो को इतना भी नसीब नहीं होत।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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