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महिला सशक्तीकरण

  • आज एक विश्व की  सबसे बड़ी समस्या महिला अपराध है, महिला अपराध दिनों-दिनों बढ़ते जा रहे है  जिसका अब तक कोई भी निदान नहीं निकला है हर तीन महिला में  से एक महिला घरेलु हिंसा का शिकार होती हैं जिसका एक कारण पुरूषसत्तात्मकता होता  है। उसके अनुसार घर की महिला दासी और बाहर की महिला वस्तु होती हैं।   महिला को अपने अधिकार इसलियें जानना चाहिये क्योंकि वहां उसका सदूउपयोग कर सके पुरूष उसका दुरुपयोंग न कर सके ।एक दे श की उन्नति उस देश की महिला की उन्नति पर निर्भर करती हैं।पूरे विश्व में ३७ % महिला ही अर्थव्यवस्था में अपना योगदान देती हैं जबकि भारत में २०% महिला अर्थव्यवस्था में अपना योगदान देती है ़। ये बतता है कि महिला  अभी कितना दूर है।  महिला  व्यापार में अपना योगदान  बहुत कम देती है और साइंस के फील्ड में भी उसका योगदान बहुत कम हैं। जब बात महिला सशक्तीकरण की   होती हैं तो उसमें सबसे पहली आवश्यकता महिला को सामाजिक ,अार्थिक ,राजनीतिक सभी में भागीदार होना जरूरी हैं । उसका आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त होना आवश्यक हैं उसे अपने अधिकार के लिये जागरूक होना चहिये ।                                    महिला अधिकार  -अनुच्छेद १४ के तहत उसे समानता का अधिकार मिला है पुरूषों के समान उसे भी समान कार्य के लिये समान वेतन मिलने का अधिकार हैं अनुच्छेद २३ के तहत उसे शोषण के विरोध अधिकार मिला हैं   ।  

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..