कलाम के जीवन का संघर्ष





















"सफलता कभी निश्चित नहीं होती असफलता कभी भी अंतिम नहीं होती "

कलाम के ऊपर ये बिल्कुल सटीक बैठती है ,जिन्होंने जिंदगी में अनेक तरह की असफलता का मुंह देखा किन्तु कभी हार नहीं मानी और लगातार 
अपने सपने को पूरा करने के लिए परिश्रम किया.

 और इसी बीच में उन्होंने  एक करके अपने परिवार के चार लोगों को खो दिया जिसने उन्हें अपने काम के प्रति पहले से ज्यादा प्रतिबद्ध बना दिया और फिर उन्होंने अपने काम पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया और अपने पिता और जीजा जी की कही हुई बातों को याद किया" कि हर किसी को नहीं मिलता मौका पढ़ाई करने का
खासकर जब उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी न हो "कलाम तुम्हें अपने देश का नाम ऊपर करना है इसलिए तुम अच्छे से पढ़ाई करों . 

 कलाम के लिए जैसे ये बातें पत्थर की लकीर बन गयी और फिर उन्होंने अपने काम को पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ किया 



और फिर कलाम ने वो कर दिया जिसने उनका नाम "मिसाइल मैन "में बदल दिया . 


*कलाम ने अपने काम से हर उस शख्स को प्रेरित किया जो तमाम मुसीबतों के बावजूद अपने काम को कर रहा है . 













Comments