जब इरादे हो मजबूत तो फिर खौफ किसका । आठसाल की आयु से ही जिसने बैंडमिटन खेलना शुरू कर किया और बचपन से ही अनुशासनपूर्ण जीवन जिया और बहुत कड़ी मेहनत की , अपनी पसंद को अपनी खूबी में बदल जो आज भारत की वर्ल्ड चैंम्पियन में ५ पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला बनी , उनकी ये जीत काबिले तारीफ है । सिंधु अपने खेल के लिये बहुत सजग है वे हर दिन सुबह ४ बजे उठाकर अभ्यास करती है ।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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