भारत अपनी सभ्यता संस्कृति के लिए जाना जाता है..जहां अनेकता में एकता का संदेश दिया जाता है..वहां जब बात छठ की आती है...तब बात ही कुछ और होती है.. जहां ज्यादातर त्योहार उगते सूरज को देखकर मनाए जाते है. वहीं छठ में उगते और ढलते दोनों समय भगवान सूर्य देव और माता छठी की पूजा की जाती है।
प्रकृति से जुड़ा ये त्योहार कई मायनों में खास है..जिसका अपना सामाजिक और आर्थिक, धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है...जो इसे खास बनाता है..जिसमें विवाहित महिलाएं परिवार की सुख समृद्धि और संतान के लिए छठ का व्रत रखती है..जो सबसे कठिन माना जाता है..जिसमें वो 36 घंटे का निर्जला उपवास रखती है..जिसकी शुरूआत नहाए खाए से होती है..
आज के समय में जब हम अपनी संस्कृति काफी हद तक भूलते जा रहे है..ऐसे में ये छठ हमें अपनी संस्कृति से जोड़ने का काम कर रहा है..
"छठ का त्योहार हमें सीखता है इंसान कितना भी आधुनिक हो जाए पर उसे अपनी परंपरा नहीं छोड़नी चाहिए।"
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