why are sensitive are dead

मरती संवेदनाएं और खत्म होते हम

अगर पूछे कि ऐसी कौन सी चीज है.जो इंसान को इंसान बनाती है..तो इसमें संवेदना की बड़ी अहम भूमिका बन जाती है..जो इंसान को इंसान होना सिखाती है..जब ये संवेदनाएं मरने लगती है..तब एक अलग ही त्रासदी जन्म लेती है...
आज के समय में कहीं न कहीं हमारी संवेदनाएं खत्म हो रही है..जहां हम हंसना रोना भूल ही गए है..सबसे अजीब बात तो ये है..कि अब हम किसी चीज को समझना नहीं चाहते है..हम इंसान कम मशीन ज्यादा हो गए है..
विकास की अंधी दौड़ में हम ये सोचना ही भूल गए है..कि हम इंसान है.जो समूह के साथ रहता है..एक दूसरे पर विश्वास करता है..वो आज थोड़ी थोड़ी बातों पर आक्रामक हो जाता है..जो गुस्सा करने लग जाता है..जिसमें चेतना की सबसे ज्यादा कमी है..जो इंसान कम जानवर ज्यादा हो गया है..
जिस पर हमें विचार करने की जरूरत है..कहीं ऐसा न हो कि बहुत देर हो जाएं..

 

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