Creativity के नाम पर मतलब कुछ भी



कला मतलब जीवन। कला वो जिसके जादू में इंसान खो जाता है। जो उसे जीने का नजरिया देता है। लेकिन जब उसी कला का उपयोग करके आस्था के साथ खेला जाए तब सवाल करना जरूरी हो जाता है। कि कहीं कला के नाम पर हम अपने आप से तो खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं।
हम बात कर रहे हैं आजकल की संस्कृति की आधुनिकता के नाम अपने भगवान को मनुष्य रूप में देने की कोशिश करना। इतना काफी न था कि हम उन्हें कॉर्टून का रूप देने लगे। बाजारीकरण और लाभकारी सोच के चलते हम अपने आस्था से ही खिलवाड़ करने लगे। जिस प्रवृत्ति पर हमें अकुंश‌ लगाने की जरूरत है कहीं ऐसा न हो कि हम खुद को ही खो बैठे। 

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