बेटी एक परिवार का मान सम्मान। जो घर की इज्जत का प्रतीक मानी जाती है। जिसके नन्हें कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी रख दी जाती है।
जब तक समझती है वो दुनिया दारी को तब तक उसे उसकी सीमाएं बता दी जाती है।
जब वहीं सीमाओं को तोड़ वो अपने लिए कुछ करती है तब वो घर से भागी हुई लड़की के नाम से जानी जाती है। जहां उसके अपने तोड़ लेते हैं उससे अपना नाता जहां वो घर से भागी बेटी बन समाज की नजरों में सबसे बुरी बन जाती है।
भले ये समाज दहेज के लिए मार दी गयी लड़कियों के लिए ज्यादा कुछ न बोले लेकिन घर से भागी लड़कियों के लिए वो न्यायधीश बन जाता है। शायद इसलिए समाज और परिवार से
डर वो लड़कियां भाग जाती है। क्योंकि उन्हें मालूम रीति रिवाज के नाम पर उनको बेड़ियों में बांध दिया जाता है।

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