union carbide: वो सवाल जैसे आज भी जिंदा है


नमस्कार मैं पूजा सेन आज हम आए हैं। यूनियन काबाईड की फैक्टी में... आपको बता दूं कि ये वो ही फैक्टी है..जहां पर साल1984 2-3 दिसम्बर को एआईसी गैस का रिसाव हुआ था..जिसमें 1500 ज्यादा लोगों की जानें गयी ...जो आज भी भोपाल के लिए एक बुरे सपने जैसा है। 
भले ही उस हादसे को बीते 39 साल हो गए हो..लेकिन इस फैक्ट्री को देख वो खौफनाक मंजर हमारी आंखों के सामने आ जाता है। जहां लोगों की चीख पुकार मची हुई है । जिसमें हमें लोग भागते हुए नजर आ रहे है..

फैक्ट्री के अंदर जहां पर गैस लीक हुई थी ..उस जगह पर चीजे जस के तस रखी हुई है..बस आज फर्क इतना है कि यहां से जहरीला कचरा पीथमपुर ले जाएगा गया है..इसके अलावा यहां पर कुछ भी नहीं बदला है..

अफसोस इस गैस से पीड़ित लोग आज भी न्याय की राह देख रहे है..इस फैक्ट्री के आस पास बसी बस्तियां जमीन का जहरीला पानी पीने को मजबूर है..जिनके जख्म 39 साल बाद भी उतने ही हारे है..जितने की पहले थे..
यहां आस पास रहने वाले लोगों से जब मिले तो मालूम चलता है....भले ही सुप्रीम कोर्ट ने अनेकों आदेश दे दिये हो..उसके बावजूद यहां के लोग जमीन का जहरीला
 पानी पीने को मजबूर है। जिनकी न जाने कितनी नस्ले इस गैस के चलते सांस की समस्या का शिकार हो रही है। 

भोपाल से पूजा सेन की रिपोर्ट...




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