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Media Reality: सिर्फ गलतफहमी होती

सिर्फ गलतफहमी होती
अक्सर लोगों को लगता है कि 
अखबार को पड़ने वाले से ज्यादा 
उसमें लिखने वाले स्वतंत्र से होगें
उन्हें कौन समझाएं
उनके हाथ तो पेज पलटने से ज्यादा लिखने में बंधे होगें
जहां पाठक स्वतंत्र होकर विचार कर सकता
वहां कॉपी एडिटर जिम्मेदारी के बीच बांधा सा होगा
इसे विडम्बना न‌ कहें तो क्या
जहां दुनिया की आवाज बनने वाला ही बेजुबां हो जाएगा। 

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