आज भारत अपना 78 वां गणतंत्र दिवस मना रहा है...दूसरी तरफ एक बार फिर बेटियों की आजादी का मुद्दा देश में गर्मा रहा है...जहां वो अपने घर से लेकर बाहर कहीं भी सुरक्षित नहीं है...कोलकता में हुआ घटनाक्रम जैसे देश में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर गहरे सवाल खड़ा कर रहा है..जहां पर 2012 निर्भया रेप हत्याकांड जैसे फिर से दुहाराया गया...देश की बेटी इंसाफ मांग रही है...
पर आखिर कब तक कैडेल मार्च निकलकर ये मुद्दा शांत कर दिया जाएगा...
जो लोग इस बीच कह रहे है न कि आज देश में केवल लड़कियां ही नहीं बल्कि लड़के भी सुरक्षित नहीं है... उन्हें जरूर एक बार अपने आस पास देखना चाहिए...जहां मां के गर्भ से लेकर दुनिया में आने तक कहीं भी सुरक्षित नहीं है...
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई देश में लड़कियां आज सुरक्षित है...
जहां वो अपने घर से लेकर सार्वजनिक जगह तक कहीं भी सुरक्षित नहीं है...आये दिन उनके साथ हो रहे अपराध जैसे हर मां बाप को लड़कियों की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे है...
चलिये बात करते है आज लड़कियों की आजादी की...जहां वो बेटी अपनी मां के गर्भ से लेकर कहीं भी सुरक्षित नहीं है...ये बात कहने के लिए तो सही लगती है...कि हम लड़का और लड़की में सम्मान भाव रखते है...पर दूर दूर तक उसका कोई भाव नजर नहीं आता है...जहां बचपन से लेकर बड़े होने तक वो किसी न किसी के संरक्षण में पालती है...जब बात आती है उसे अधिकार देने की वहां हम उसे अधिकार के ़ नाम पर शोषण कर उसे अधिकार देने का झुनझुना पकड़ा देते हैं। इसे अलग दोनों जानते हैं कि उसे कहां कितने अधिकार दिए गए। जहां बरसों से रीतिरिवाजों के नाम पर उसे ठगते आए। इसके बावजूद हम कहते हैं आजाद है बेटियां।

Comments