मानव चला प्रगति से विध्वंस की ओर
एक एक कर सबकुछ है गंवाया
बचा न कुछ शेष
सबकुछ नष्ट कर
उसे प्रगति का नाम तुमने दिया।
आज जब अनेक तरह की परेशानी से जूझ रहे हो तुम
तब उसका कारण सिर्फ तुम
सम्भाल जाओ वरना
तुम भी एक दिन चले जाओगे
अपने अस्तित्व को मजबूत बनाओ तुम वरना
विनाश के बाद खत्म हो जाओगे।

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