हाँ बेटियां खतरे में तो है






हाँ बेटियां खतरे में तो है
पर वो हमारे समाज से ज्यादा
माँ की कोख में है
जहां वो इस दुनिया में आने से पहले ही अलविदा कर दी जाती है। 
गांव नहीं शहरों में बेटियों की भ्रूण हत्या की जाती है
जहां पढ़े लिखे के द्वारा
ये रस्म अदा की जाती है। 
जो कहते हैं कि हिन्दू लड़कियां आज खतरे में है
उनकी बात सही तो है
पर वो किसी धर्म से नहीं
माँ की कोख में ही मिटा दी जाती है । 
आकड़े देखों तो मालूम चलता है
लैंगिक अनुपात में आज उनकी संख्या कितनी कम नजर आती है
जहां हर दिन 57 बेटियों माँ के गर्भ से ही विदा कर दी जाती है। 

जिसे कोई अनपढ़ नहीं
बल्कि पढ़े लिखों की समझदारी मार देती है
जो गरीबों के घर में नहीं
अमीरों की दहलीज नहीं छू पाती है। 

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