नगर में ये खबर जोरों से है
कि उसकी बेटी भाग गयी
हर कोई उसे जलील करने में लगा है
इस बीच किसी ने ये खबर न ली
कि वो आखिर भागी किस के साथ
अपने सपनों के साथ
या अपने हमसफर के साथ
अफवाहों
के बीच मालूम चला
कि वो भागी नहीं
उसे मार दिया गया
ताकि वो न भर सके
अपने सपनों की ऊंची उड़ान।
सुनो सुनो गांव में ये खबर फैली
घराने की बहु ने मार दिया अपने पति और
जेठ को
बनी बहु शेरनी ,सुनो सुनो
हर अखबार में ये खबर की सुर्खी बनी
किसी ने ये फुरसत न ली
कि आखिर वो ममतामायी से क्यों हत्याराना बनी?
क्यों उसने अपने सिर सफेद ओढ़नी को चुनी
क्यों बहु अपने ही परिवार की दुश्मन बनी।
जिसे सिर्फ अत्याचार सहने के लिए बनाया गया
अब जब वो इंसान बनी तो क्यों उसे इंसान नहीं समझा जा रहा है ?
जिसको लेकर हर किसी का अपना दोगलापन रहा है।
जो केवल तब तक ही नारी
जब तक वो हर अत्याचार को सहे
सवाल करने पर लोग उसे डायन कहें
ये सवाल तब क्यों नहीं होता
जब किसी लड़की के गले का फंदा उसका अपना
शादी का जोड़ा होता।
हमें तब भी बुरा उतना ही लगना चाहिए
जब अत्याचार की सारी हदें उस नारी पर पार होती ।
जो वैसे तो देवी का रुप
पर जब सवाल अपने हक का करें तो
वो ही घर की भेदी होती
जिसे चुप रहना ही सिखाया गया है
सादियों से उसे
खोखले रीति रिवाजों में बांध कर रखा गया।
अब जब वो इंसान बन
अपनी आजादी की बात करती
तब वो हमारी नजरों में गलत क्यों होती?

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