गणतंत्र दिवस के मायने





गणतंत्र से आशय 


एक ऐसा तंत्र जिसमें जनता का ,जनता के लिए, जनता के द्वारा बनाया गया शासन होता है। जहां जनता ही सर्वोपरि होती है। जिसमें जनता का प्रतिनिधि होता है।  वो गणतंत्र कहलाता है।
 
महत्व


  • 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया था। 
  • इस दिन संविधान की आत्मा उसकी प्रस्तावना को अपनाया गया था।
  • ये दिवस हमें एक दूसरे के प्रति समानता, बंधुत्व, न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को मनाने का अवसर प्रदान करता है।



प्रासंगिकता

कानून से ऊपर देश का कोई भी नागरिक नहीं है फिर चाहे वो किसी धर्म या जाति का हो । संविधान के आगे सब समान है। जो नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन जीने का हक देता है। अपने अधिकारों का उपयोग करने का बल देता है।

आज के समय में जब सरकारे खुद को राजा समझ जनता को भूलने की कोशिश करने लगी है। तब उन्हें ये याद दिलाना जरुरी होता है कि जो जनता वोट देकर उन्हें जीतना जानती है। वो उन्हें हारना भी जानती है। जिनके एक- एक वोट की कीमत है।

 गणतंत्र  और  आज की समस्या 

  1. धर्म पर राजनीति - जब राजनीति में धर्म , धर्म में राजनीति आने लगे तब समझ लिया जाना चाहिए। राजनीति और धर्म दोनों ही संकंट में है।  
  2. भाईचारे की भावना का कमजोर होना- संविधान हमें देश की एकता, अखंडता के लिए किसी भाषा, बोली, धर्म, और क्षेत्रीयता से  ऊपर उठ एक दूसरे का सम्मान करना सिखाता है। उसे भूल आज हम खुद को पहले किसी खास धर्म का प्रतिनिधि बताने में लगे है।
  3. गरीबी- ये बड़ा दुखद है कि आज हमारे देश में जहां एक तरफ अमीरों की संख्या में बढ़ रही है। वहीं गरीबी रेखा के नीचे आने वालों लोगों का आकड़ा आसमान छू रहा है। जो किसी भी देश के विकास के  लिए बड़ा बाधक है। जो असमानता को बढ़ा रहा है।

  • इसके अलावा क्षेत्रीयता,धार्मिक कट्टरवाद, और चुनाव का दुरुपयोग,विश्व महिला अनुपात हमारे गणतंत्र की प्रमुख समास्याओं में से एक है। 


निष्कर्ष



आज हम सब को एक बार फिर उस गणतंत्र की परिभाषा को याद करने की जरुरत है जिसमें वो  एक ऐसा तंत्र की बात करता है जिसमें जनता का , जनता के लिए बनाया गया शासन होता है। जहां जनता स्वयं अपना मालिक है। जिसके लिए उसे अपने अधिकार और कर्तव्यों दोनों पर अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी। जात-पात से ऊपर उठ एक साथ मिल देश के विकास में अपनी भूमिका का निर्वाहन करना होगा।

आने वाले समय में गणतंत्र का दृष्टिकोण


धर्म एक बार फिर कानून से ऊपर जा रहा है । जहां लोग कानून से भी ऊपर आस्था को मनाने लगे है। जो किसी भी लोकतंत्र  वाले देश के लिए सही नहीं है।
आने वाले समय में जातिगत जनगणना से आरक्षण का मुद्दा अन्य राज्यों में भी गरमा सकता है।
डीप फेक जैसी तकनीक चुनाव के परिणामों में बाधा बन सकती है।


Comments