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साहस और जुनून के बीच पकती है अन्नपूर्णी की कहानी



कितनी अजीब बात है न वो स्त्री जिसकी आधी से ज्यादा जिंदगी रसोई में ही गुजर जाती है∣ जब बात आती है उसकी इससे पहचान की तब वो कहीं पीछे ही रह जाती है ∣
अगर आज हम से पूछा जाएं कि हमारा फेवरेट शेफ कौन है ?
तब हमारे मुंह से जितने नाम निकलेंगे, वो सब पुरुष के ही होगें। जिस कारण हमारे पुरुष प्रधान समाज की वो सोच है जो केवल गरम रोटी से मतलब रखते है। जिन्हें स्त्री केवल घर के काम करते हुए पसंद है। जिसे आज भी समाज की बेड़ियों ने जकड़े हुए रखा है।

ऐसे में हमें पुरुष प्रधान समाज को चुनौती देते हुए अन्नपूर्णी की कहानी बड़ी प्रेरणा देती है ।


जो अन्नपूर्णी नाम की एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसे टेस्ट को लेकर बहुत जानकारियां है। जो आंख बंद करके भी बता सकती है कि वो कौन सी डिश है।

ऐसे में जब उसे अपने दोस्त के पिता द्वारा ये मालूम चलता है कि खाना बनाने वाले के लिए भी एक बेहतर करियर है जिसके लिए उसे होटल मैनेजमेंट करना पड़ेगा। तब अन्नापूर्णा मास्टर शेफ बनने का ख्वाब अपनी आंखों में सजोती है।

हर कहानी की तरह उसके जीवन में भी अनेक चुनौतियां आती है। जहां कभी उसे अपने विचार, तो कभी अपनों से लड़ाई लड़नी पड़ती है। जहां उसके पिता ही उसके सपनों के बीच खड़े हुए दिखाई देते है। जिनका मानना होता है कि अगर उनकी बेटी शेफ बनी तो उसे मांस भी बनाना पड़ेगा। इससे उनका धर्म नष्ट हो जाएंगा।


ऐसे में ये देखना बड़ा ही दिलचस्प होता है कि जब अन्नापूर्णी के पिता उसे मांस का सेवन करते देखते है तो फिर अन्नापूर्णी का जीवन किस करावट में मोड़ लेता है। जहां वो मास्टर शेफ बनने की यात्रा को पूरा कर पाती है या नहीं।

इस फिल्म की सबसे अच्छी अगर कोई बात है तो वो  है रसोई में पकते सपनों की है। 

इसके अलावा फिल्म के कुछ डॉयलाग जो हमें जीवन में  कुछ बेहतर करने की प्रेरणा देते है-

  • जीवन में सपने और निजी विचारों के बीच संंतुलन बनाना जरुरी होता है।
  • जब तक हम किसी काम को मन से नहीं करेगें तब तक उसमें सफलता नहीं मिल सकती है।
  • जिंदगी में करियर एक ऐसी चीज है जो हमको हमारी अभिव्यक्ति का जरिया देती है।
  • लोग सिर्फ सफलता देखते है।



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