आखिर कौन थे केएम करियप्पा , जिनसे जुड़ा है आर्मी डे का इतिहास





अपने लिए तो सब जीते है। पर जो वतन के लिए जीते और वतन के लिए मरते है। उनको हम बलिदानी कहते है। जिनके रक्त की एक एक बूंद वतन के लिए बहती है। जो वतन के लिए हंसते हंसते अपने प्राण दे देते है।
उनके बलिदान को समर्पित करते हुए हर  साल हम 'आर्मी डे' मानते है।


'केएम करियप्पा' जो इतिहास में अपना नाम दर्ज करा गए


अगर हम इसके इतिहास पर गौर करें, तो सन् 1949 में फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने जनरल फ्रासिंस बुचर से भारतीय सेना की कमान ली थी।
 इसी के साथ करियप्पा भारत के पहले कमांडर- इन -चीफ बन गए थे। 
करियप्पा के पहले भारतीय चीफ बने के अवसर पर हर साल 15 जनवरी को इंंडियन आर्मी डे मनाया जाता है।

सौनिके के  अदम्य, साहस ,शौर्य , को याद करते मनाया जाता है ये दिवस

बता दें कि करियप्पा पहले ऐसे भारतीय थे जिन्हें फील्ड मार्शल की फाइव स्टार रैंक दी गयी थी।
इस दिन पूरा देश उनके अदम्य ,साहस , त्याग और शौर्य को याद करते हुए ये दिवस मनाता है।

अशोक चक्र से नवाजे जाते है वीर सैनिक

इस दिन आर्मी के मुख्यालय में  मैलिट्री का शो का आयोजन किया जाता है।  उन सैनिकों को सलामी दी जाती है जिन्होंने अपने प्राणों का बलिदान देश के लिए कर दिया। इसके लिए उन्हें परमवीर और अशोक चक्र से नवाजा जाता है। 


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