क्या आज का युवा वास्तव में सोया हुआ है। जहां वो ये नहीं देख पा रहा है कि वो स्वयं ही दूसरें के जाल में फंस अपनी जिंदगी को कर रहा बेहाल है।
जहां उसकी जिज्ञासों को खत्म करने की वजह उसे बेबुनियाद सी बातोंं के पीछे लगा दिया जा रहा है।
शायद यहीं वजह है कि जब देश में कम पढ़े लिखे लोगों को फूलों की माला और पढ़े लिखें लोगों को पुलिस की मार मिलें तो इस पर ज्यादा आश्चर्य नहीं करना चाहिए।
जिससे हम युवाओं का कोई मतलब ही नहीं है। बुरा तो केवल हमें तब लगता है। जब बात हमारी परीक्षा के रिजल्ट की हो। जब भाई बहन को गर्लफ्रेंड और ब्रायफ्रेंड समझ किसी से मार मिलें। तब बात सही और गलत की आ जाती है। तब हमें आस पास की परेशानी समझ आती है।
तब भी हम केवल गाली राजनीति को ही देते है। किन्तु उसकी जड़ तक पहुंचने से आज भी हम डरते है।
अफसोस उसे हम अपनी लाचारी बना ऐसे लोगों के सामने पेश करते है। जैसे हम युवा न होकर केवल लाचार इंसान है।
शायद यहीं कारण है चुनाव में रोजगार भले गायब रहें किन्तु धर्म के नाम पर की जा रही राजनीति जारी रहती है। जहां हम नायक फिल्म के हीरों की तरह करना तो बहुत कुछ चाहते है। पर कुछ कर नहीं पाते है।
आखिर हम कमजोर जो है। जो दुनिया को बदलाना तो चाहते है किन्तु उस बदलाव की शुरुआत खुद से नहीं करना चाहते है।
जो देश को गाली तो हजार पर उसके सुधार की कोई बात नहीं करते है।
जिनको केवल मतलब चाय के कप से। फिर चाहे उसे बनाने में लगने वाली गैस , शक्कर और दूध कितने का हो उनको इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।
अगर ऐसा ही चलता रहा, तो वो दिन दूर नहीं जब हम केवल नारे लगाने और प्रचार करने के अलावा कुछ करने के लायक नहीं बचेगें। जहां हमारा कुछ वास्तविक न होकर सबकुछ नकली रहेगा। किन्तु हम फेसबुक की स्टोरी देख खुश रहेंगे। आखिर हम अमृत काल में जो प्रवेश कर रहे है।
किन्तु हम अपनी एक जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएंगे। वो है फोन के नेट का 100 प्रतिशत उपयोग। जिसे 50 प्रतिशत खत्म कर हमारी नींद कहां लगती है।
आज वर्तमान समय की जरुरत है युवा के जागरण की । जो सच गलत के फर्क को समझें। जो देश को अपनी जिम्मेदारी समझ उसके लिए कुछ बेहतर काम करें। इसके लिए सबसे पहले वो खुद काल्पनिक दुनिया से बाहर निकल एक जिम्मेदार इंसान बनें। जो फोन की दुनिया से नहीं वास्तविक दुनिया में रहना जानता है। जो शिकायतें सिर्फ करता नहीं उसे सुलझाने की बात करता है।
इसके लिए जरुरी है कि वो किसी भी तरह के अंधविश्वास और धर्म की राजनीति से हट मूल मुद्दों को समझें। तर्क और विज्ञान पर बात चीत करें।

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