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सर्दी का मौसम जैसे हम सबकी परीक्षा की घड़ी होता है। जहां बिस्तर छोड़ जमीन पर पैर रखने का हमारा कहां पर मन होता है।
जहां चाहे कितनी ठंडा क्यों न हो हर किसी को अपना काम उसी प्रतिबद्धता के साथ करना होता है।
आलस्य से भरे इस मौसम में अपने काम लगातार करते रहने का जिम्मा जैसे हमारे सिर पर होता है।
जहां अपने काम को लेकर हमें पहले से ज्यादा पेशेवर होना पड़ता है । खाने के बाद आने वाली नींद को नजरअंदाज कर न सोने का व्रत हमें लेना होता है।
जहां धूप में बैठे तो गर्मी और धूप से निकले तो ठंडा का एहसास जैसे हमें होता है। इसके बावजूद जब हम ठंडे पानी को स्पर्श करते है तब हमारे डर से हमारा साक्षात्कार होता है।
जहां धूप में बैठे तो गर्मी और धूप से निकले तो ठंडा का एहसास जैसे हमें होता है। इसके बावजूद जब हम ठंडे पानी को स्पर्श करते है तब हमारे डर से हमारा साक्षात्कार होता है।
ये मौसम जैसे हमें सिखाता है जीवन नहीं बना सिर्फ आराम के लिए उसमें लगातार आलस्य के बीच खुद पर बेहतर काम करना होता है।
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