पब्लिक है ये सब जानती है
कौन कितना बड़ा खिलाड़ी है ये सब को पहचानती है
गिरगिट की तरह बदल जाते हैं वो नेता वोट लेकर
उनके बदले हुए रंग को वो अच्छे से पहचानती है।
स्वार्थ होता है तो आते हैं जनता से मिलने
नहीं तो ये उनको सिर्फ़ नजर अंदाज करना जानते हैं।
मंहगाई हो या बेरोजगारी सबको नजर अंदाज कर
ये केवल धर्म पर बहस कर
मुद्दों को भटकना जानते हैं।
पर पब्लिक इतनी नादान भी नहीं
वो इनकी नस को पहचानती है।
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