कुछ कहने से पहले

 
 अक्सर हम भूल जाते है

न सोचा न समझा 
केवल कह दिया
क्योंकि हमें ऐसा ही लगता है
वो क्या जानें हमारे बारे में
हम ही जानते है
अपने बारे में
हम सा वो व्यस्त कहां है
ये सोच
इंसान अक्सर भावनाओं में बह सा जाता है ∣
बिना एक पल ये सोचे की 
आज कल उसका हल क्या है
हालात उसके कैसे है
इंसान भावनाओं में बह 
  सा जाता है ∣
बुराई अच्छाई से मतलब नहीं होता है उस समय
 केवल प्रश्न
एक दूसरे के समझने का होता है ∣


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