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दिखावा या छलावा


नवरात्रि आते ही जो लड़की लोगों को देवी का रूप लगने लगती है । वो न जाने बाकी दिनों में उन्हें इंसान तक क्यों नहीं लगती है । 
आएं दिन की खबरें पढ़े तो मालूम चलता है कि अभी भी हमारे समाज में लोगों के दिमाग में कितनी गंदगी भरी है।  जो वैसे तो मुंह में दही जमाकर बैठे रहते है।
पर जब उन्हें मालूम चल जाएं किसी की लड़की भागी है। तब तो जैसे मुर्दाें में भी जान आ जाती है। 
 पर अफसोस जब बात उसकी इज्जत की आती है तो सब बेजुबानं सा हो जाते है।
अभी हाल ही का मामला ले लो जब उज्जैन में एक 12 साल की लड़की लोगों से मदद की भीख मांगती रही , पर किसी की मजाल की वो उसकी मदद कर दें।

बात सिर्फ इतनी सी है इतना दिखावा या छलावा क्यों करते है वो लोग, जब बात आती है उसे बचाने की तो फिर क्यों पीछे हटते है वो लोग।
क्यों उन्हें तब उसमें कोई दुर्गा नजर नहीं आती है।

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