क्या हो जब हमें कहीं जाना हो, हम उसके लिए तैयार ही हो कि तेज बारिश हो जाएं। ऐसे वक्त में हमारे जुनून की असली परीक्षा होती है। एक मन कहता है कि कभी और चलेगें किन्तु दूसरे मन की सोच जब हमें आगे चल निकलने की बात करती है।
ऐसे वक्त में हम मन ही मन ईश्वर से ये गुजारिश करते है कि पानी थोड़ा कम हो जाएं। आगे चल हमारे आगे बढ़ने के साथ पानी की गति भी धीमी पड़ जाती है।
थोड़ी मुश्किल के बाद जैसा हम सोचते है वैसी घड़ी हमारी निकल जाती है। ऐसे में हमारी मदद उन लोगों के द्वारा कर दी जाती है जिनके बारें में हमने कभी सोच भी नहीं था।
आखिरकार हम अपनी मंजिल पर पहुंच ही जाते है।
जब घर आकर हम इन सब बातों पर विचार करते है तब लगता है कि कभी कभी कुछ चीजों पर सकारात्मक सोच मायने रखती है।
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