जीवन का सही अर्थ बताती है आज जवानी पर इतारने वाले'


आज जवानी पर इतारने 
वाले कल पछताएंगे।

जीवन के अपने चरण होते है जहां उसका बालपन, युवावस्था, वृद्धावस्था होती है। इसमें व्यक्ति सबसे ज्यादा जिस अवस्था का आनंद लेता है वो उसका बचपन होता है जहां पर उसे किसी भी तरह की कोई फिक्र नहीं होती है।जैसे -जैसे वो बड़ा होता है वो अपनी जवानी का मजा लेता है।  
इस बीच जब वो किसी बूढ़े व्यक्ति को देखता है तब वो ये वहम पल लेता है कि उसकी ये अवस्था आएगी ही नहीं।ऐसे में ' आज जवानी पर इतारने वाले' कव्वाली हमें जीवन का गहरा अर्थ बताती है।
जहां हर इंसान जब किसी दूसरे व्यक्ति को जाते देखता है तो उसे लगता है कि वो अमर है। वो ये भूल जाता है कि जन्म और मृत्यृ जीवन का सत्य है।
इसके बावजूद वो अपनी जवानी पर गर्व करता है। पैसे औऱ पद के लालच में वो ईश्वर को भूल जाता है जो उसे इस दुनिया में लाया है। वो अपने स्वार्थ के पीछे सबकुछ भूल जाता है। 
 सिंकदर जिसने पूरी दुनिया को जीता था। जब वो इस दुनिया से गया। तो वो खाली हाथ गया। उसके हाथ में न उसके जीत थी , न घोड़े, न पोरस, न उसका अभिमान था। ऐसे में ये आम इंसान क्या बड़ी चीज है। 
मौत आने पर सारे रिश्ते पीछे छूट जाएंगे। समय के साथ वो भी उसे भूल जाएंगे। दो दिन की जिंदगी है।
मुट्ठी बंधा कर आने वाले ये इंसान, कल हाथ पसरे जाएगा। चढ़ता सूरज धीरे धीरे ढलता है ढल जाएगा। 

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