परीक्षा वोे डर जिससे हर किसी व्यक्ति का कभी न कभी सामना होता है। फर्क महज इतना सा होता है कुछ परीक्षा के बारें में उसे पता होता है कुछ से वो अनजान सा होता है।
जीवन के हर आयाम को पार करने के लिए उसे अनेक तरह की परीक्षा देना होता है। कुछ परीक्षा में वो जीत, तो कुछ में हार जाता है। इसके बावजूद उसे चलना जारी रखना होता है।
अक्सर इस बीच हमें लगता है कि परीक्षा केवल कुछ नंबरों की है किन्तु असल में वो नंबरों के अलावा बहुत कुछ की होती है। जो मांग करती है व्यक्ति के साहस की, उसके बढ़ते घटते धैर्य की ।
व्यक्ति चाहे जितना भी कह दें कि उसे तोे केवल नंबर ही पास करना होता है किन्तु उसके लिए उसे बहुत कुछ सह आगे निकल जाना होता है।
हमें लगता है कि वो केवल कुछ नंबरों की बदौलत ही पास होता है किन्तु नंबरों से पहले उसे अनेक तरह की मुश्किलों से गुजरना होता है।
इस बीच सफलता और असफलता का डर भी उसे होता है। अपने डर से जीत उसे आगे निकल जाना होता है।
इस बीच उसका खुद पर विश्वास जरूरी होता है। फिर चाहे लोग क्यों न कह दें कि कैसे होगा सब कुछ ? ऐसे वक्त में भी उसे खुद पर विश्वास रखना जरूरी होता है।
इस बीच उसका खुद पर विश्वास जरूरी होता है। फिर चाहे लोग क्यों न कह दें कि कैसे होगा सब कुछ ? ऐसे वक्त में भी उसे खुद पर विश्वास रखना जरूरी होता है।
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