वो माँ बाप जो तिनका तिनका जोड़कर हमें पढ़ते हैं ∣ इस काबिल बनाते हैं कि हम अपने पैरों पर खड़े हो जाएं। इसके विपरीत जब हम अपने पैरों पर खड़े हो जाते हैं ∣ तब वहीं माँ बाप हमें बोझ से लगने लगते हैं ∣
उनके एक एक पैसे का हिसाब हम रखने लगते हैं ∣ हम उन पर खर्च करने वाले पैसे दुनिया को ऐसे गिन गिनकर बताते हैं जैसे हम उन पर बहुत बड़ा अहसान कर रहे हैं ∣
अफ़सोस ये केवल आज की नयी पीढ़ी ही नहीं पुराने पीढ़ी के लोग भी करते हैं ∣ जो करते तो बड़ी बड़ी बातें हैं किन्तु जब बात उन पर आ जाती है तब वो अपने माँ बाप को बोझ समझने में देरी नहीं करते हैं ∣ इसके बावजूद वो उम्मीद करते हैं कि उनके बच्चे उन्हें सिर आंखों पर रखेंगे।
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