इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक वो जो अपने हर काम को बहुत गोपनीयता के साथ करते हैं । दूसरे वो जो अपने हर छोटे बड़े काम को लोगों के बीच बड़े ही व्यवस्थित ढंग से प्रसारित करते हैं । भले ही उस काम को शुरू करें उन्हें कुछ ही वक्त हुआ।
शायद यहीं कारण है कि हमारे बड़े बूढ़े के द्वारा ऐसा करने की मनाही की गयी है ।
हम सब ने वो कहावत तो सुनी ही है कि 'जो बादल गरजते है वो बरसते कम ही है ।'
बचपन में तो हम इसके अर्थ को ज्यादा नहीं समझ पाते थे किन्तु जैसे जैसे हम बड़े होते हैं इसके अर्थ को समझ पाते हैं।
कि जीवन में हम चाहे जिस भी काम को करने जाएं। पहले से उसके बारे में शोर न करें। जब तक की हम उसमें सफल न हो जाएं। तब तक हमें उसे शांति से करते रहना चाहिए।
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