पिता केवल शब्द नहीं


पिता केवल शब्द नहीं 
बहुत कुछ होते हैं। 
वो होते हैं एक संघर्ष की मूर्त
जो खुद‌ धूप में रह
हमें छाया देते हैं। 
जो खुद चाहे सह ले कितना कष्ट पर हमें जरा सी चोट नहीं लगने देते हैं। 
जो बाहरी दुनिया से मज़बूत बनाने के लिए हमें तैयार करते हैं। 
पिता केवल शब्द नहीं बहुत कुछ होते हैं। 

इस दुनिया में जब बात उन लोगों की आती है जिनको हमारी सबसे ज्यादा चिंता होती है । जो हमारे बारे में कभी भी बुरा नहीं सोचते हैं वो केवल हमारे माता पिता होते हैं । 
जो स्वयं कष्ट झेलकर हमें बेहतर चीज देने की कोशिश करते हैं जिनके लिए अपनी खुशी बाद में हमारी खुशी पहले होती है वो कोई और नहीं हमारे माता पिता होते हैं । 
एक ओर माँ जहां‌ करूणा की मूर्ति तो दूसरी ओर पिता हमारे संघर्ष के अवतार होते हैं।  
मां से तो तो हम हर बात‌ बोल लेते हैं किन्तु पिता से कहां सबकुछ बोल पाते हैं। बड़े नसीब भले वो लोग होते हैं जिनके माता पिता होते हैं। 

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