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दर्पण


जिन हाथों को पकड़ना चाहिए किताब वो
अपने हाथों से किसी की दुनिया चमकाने में लगे जाते हैं। 
जो स्वयं रहते हैं अंधकार में
वो दूसरों की जिंदगी प्रकाशित करने लग जाते हैं ∣
अफसोस जिनका खुद का कोई भाग्य नहीं
वो दूसरों के भाग्य को अच्छा करने में लग जाते हैं। 
नियति भी क्या खेल खेलती है उनके साथ
जो भले सपने का मतलब जानें , वो
 दूसरों को सपनों की चाबी थमाते हैं ∣
कुछ के लिए ये दुनिया बहुत अलग होती है
जो पैसे के आगे अपना बचपन कुर्बान कर जाते हैं। 
जिनके लिए कहां खरीदी जाती है
 किताबों वो तो केवल अपने सपनों को बेच अपना गुजारा कर पाते हैं ∣
 हर किसी के लिए नहीं होता बचपन
सभी सुखों की कामना पूरी करना
कुछ के लिए वो केवल कांटों की सेज ही रह जाता है ∣

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