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जब होती है मर्यादा की हानि

 जब - जब मर्यादा को हानि पहुंचाने की कोशिश की जाती है तब उसका परिणाम बुरा ही सामने आता है। बात चाहें रामायण की हो या, महाभारत की दोनों में ही मर्यादा की सीमा पार करने के चलते काफी हानि उठानी पड़ी थी। 
पर अफसोस, उस युग से सीख लेकर भी आज के इंसान ने खुद को चिकना घड़ा ही रहने दिया है।
पृथ्वी से मंगल पर घर खोजने वाले इंसान, आज भले ही खुद को आधुनिकता का दूत समझने की भूल कर बैठे हो किन्तु उनकी छोटी सोच जब सामने आती है जब वो भरे मंच से एक इंसान को पौराणिक कहानी का खलनायक बताने की भूल बिना उसका संदर्भ जाने कर बैठते है। 
ऐसे में सिर्फ ये कहना ही ठीक लगता है। मर्यादा तोड़ने  वाले लोग एक समय के बाद ऐसी चोट खाते है कि वो सिर्फ एक बुरा इतिहास बनकर रह जाते है जिनका न कोई आदि होता है न अंत।

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