ये किस्मत भी बड़ा अजीब सा खेल खेलती है ∣ कुछ की जिंदगी तो दीपक तले अंधेरा सा होती हैं ∣ हमें लगता है कितना कम है हमारे पास हर वक़्त दूसरे से ज्यादा पाने की इच्छा हमें होती है ∣ किन्तु इसके विपरीत कुछ लोगों को दो वक्त की रोटी भी कहां नसीब होती है ?
हमारी तरह नहीं होते उनके बड़े -बड़े सपने वो तो केवल दो वक्त की रोटी का ख्वाब देखते हैं ∣ बांटते हैं रोशनी दूसरे के जीवन में पर अफसोस अपने जीवन का अंधकार खत्म नहीं कर पाते हैं ∣ बेचते हैं पैन पेंसिल गली -गली पर खुद के लिए कुछ कहां लिख पाते हैं ? सबकी किस्मत नहीं होती सिर्फ आराम और अच्छे से रहने की∣ कुछ की तो रात तो भरी ठंड में भी सड़कों पर ही बीतती है ∣
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