ये जिंदगी भी कितनी अजीब है न

 

ये जिंदगी कितनी अनिश्चित है न, जहां पर निश्चित कुछ भी नहीं जहां लोगों का आना जाना लगा ही रहता है ∣ फर्क महज इससे हो जाता है ∣ कि कोई आज जाता तो, कोई कल किन्तु   इस दुनिया को छोड़ सबको एक दिन जाना ही होता है ∣ 


कितना अजीब है न ,जब हम किसी मरते हुए इंसान को देखते हैं ∣ तो मन में एक भी बार ये ख्याल नही लाते कि कल ये हमारे साथ भी  होगा हम भी दुनिया को छोड़ यू ही चले जाएगें,  जिसका भविष्य से दूर दूर तक क कोई नाता नहीं होगा  ∣ तब हमारी तुम्हारी जैसी कोई बात नहीं होगी, इसलिए कहती हूं जिंदगी मिली है तो उसे जी लो, कोई मिले उसे दो वक्त के मीठे बोल तुम बोलो, क्या पता  कल हम उसे मिल पाएं  या नहीं ∣  


   

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