पाकीजा मूवी जिसके नाम के आज भी कितने रिकॉर्ड है ∣ बात चाहे मूवी के संवाद की हो, या उसमें अभिनय कर रही मीना कुमारी और दिलाप कुमार की अदाकारी की हो सब ने अपने अभिनय के जरिए इस मूवी को जीवंत बनाया है ∣ जिसे आज भी देखों तो उसमें एक नयापन मिलता है ∣
इस मूवी की कहानी एक बदनसीब नरगिस जो पेशे से एक तवायफ है ∣ उसके जीवन पर आधारित है ∣ जो शब्बाद्दीन से निकाह तो कर लेती है किन्तु अपने ससुराल जाते ही उसे अपने ससुराल से इतनी नापाक बातें सुननी पड़ती है ∣ जिसके कारण वो उस घर को छोड़कर एक कब्रिस्तान में चली जाती है ∣ नियति का खेल भी अनोखा होता है वो अपनी बच्ची को जन्म देने के तुरंत बाद अपने का प्राण त्याग कर देती है ∣
वही दूसरी तरफ नरगिस के गहनों को लेकर उस कबिस्तान की एक औरत सोनर के पास उसे बेचने आयी हुई होती है और सयोग से नरगिस की बहन उसे देख लेती ओर अपनी बहन की खबर लेने के लिए उसके साथ जाती है ∣ पर बदकिस्मती से उसकी बहन तो इस दुनिया से छोड़ चली गयी होती है किन्तु अपने प्यार की निशानी के रूप में अपनी बेटी को छोड़ जाती है ∣
नरगिस की बहन उस बच्ची को लेकर अपने कोठे पर आ जाती है ∣ समय बीतता है शब्बाद्दीन को 17 साल बाद नरगिस का एक खत मिलता है जिससे उसे जानकारी मिलती है कि वो उसे अब इस दुनिया में नहीं है उसकी एक बेटी है ∣
उसकी खोज में शब्बाद्दीन कबिस्तान से लेकर उसकी बहन के कोठे तक जाता है जहां पर उसकी बहन की बातें सुन और समाज के डर से वो अपनी बेटी को बिन लिए वहां से चला जाता है ∣
एक रात नरगिस की बेटी साहिबजान एक मुजरे के लिए कहीं ट्रेन से जा रही होती है ∣ तभी रात को एक अजनबी उसके कम्पार्टमेंट में आता है और उसके पांव की तारीफ कर उसे एक खत देकर वहां से चला जाता है ∣
जब सुबह होती है तब वो इस खत को पढ़कर उसकी दिवानी हो जाती है ∣ यहां से शुरू होती है एक अलग प्रेम कहानी संयोग वश वो फिर सलीम से मिलती है ∣ जहां पर वो उसे इस डर से अपने बारे में कुछ नहीं बताती है कि कहीं वो उनसे नफरत न करने लगे और फिर वो चली जाती है ∣
अगली बार वो ट्रेन की पटरी में बेहोश मिलती है जहां से वो उसे लेकर अपने घर जाते हैं जहां अनजान लड़की को जिसके बारे में कुछ नही पाता घर वाले के दबाव के चलते वो उसे लेकर अपने घर से बाहर निकल जाता है ∣ जहां उसका अतीत उसके पीछे जाता है और साहिबजान सलीम से निकाह का प्रस्ताव ठुकरा कर अपने कोठे पर चली जाती है ∣
वहां पर वो उसे अपने निकाह में मुर्जर पेश करने को कहता है जहां वो जाती है और नृत्य करते हुए खुद को खून से लतपथ कर लेती है वहां पर नरगिस की बहन भरी सभा में शब्बाद्दीन को जलील करते हुए कहती है कि नियति का भी खेल देखिए आज तुम्हारी बेटी साहिबजान तुम्हारे घर पर मुर्जर कर रही है तभी उसके घर के एक सदस्य उसे गोली मरने आता है जिसे शब्बाद्दीन अपने सिर ले लेता है ∣ और अपनी बेटी को अपना लेता है ∣ और नरगिस की बहन की शर्त को मानकर उसके कोठे पर जाकर उसका निकाह सलीम से कर देता है और शब्बाद्दीन का इंतकाल हो जाता है ∣




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