गुल्लक मूवी रिव्यू



गुल्लक सीरीज एक मध्यमवर्गीय  परिवार की कहानी है ∣ जहां पैसे कमाने वाला व्यक्ति घर का एक ही सदस्य है ∣ पर सबकी फरमाइश पूरी करने की जैसे उसने ठानी है ∣ जिसका नाम संतोष मिश्रा है ∣ जो बिजली कार्यालय में एक क्लर्क है ∣  जिसने आज तक कोई रिश्वत नहीं ली है ∣
दूसरी पात्र शांति मिश्रा जी है जो इस घर को बंधे रखने का काम करती है ∣ और परिवार की खुशियों के लिए सदैव अपनी खुशियों का त्याग करती  है ∣

अगला पात्र है  अमन जो दसवीं के बोर्ड परीक्षा की तैयारी में लगा है ∣ जिसे  पढ़ने के अलावा सब कुछ पसंद है ∣ किन्तु वो उस समय सबको चौका देता है जब व़ो बोर्ड परीक्षा में अपने स्कूल में टाॅप कर जाता है जो पूरे 87 प्रतिशत बनकर अपने घर का नाम रोशन करता है ∣ 
और आखिर में आता है इस घर का बड़ा बेटा अनु है ∣ जो एसएससी  की तैयारी में लगा हुआ है ∣ जिसे अब एक नौकरी की तलाश है ∣ जब उसे नौकरी नहीं मिलती है तब वो एक प्राईवेट नौकरी करने लगता है∣ और एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति की तरह अपनी पहली सैलरी से अपने लिए बाटा के 8 हजार के जूते खरीदने की कोशिश करता है ∣ पर उसकी खुशियां उस समय खत्म ह़ो जाती है ∣ जब अमन के दाखिले के लिए पैसे की कमी हो जाती है और फिर उसे अपनी पूरी तनखाह के पैसे  उसके एडमिशन में देने पड़ते है ∣


और इस पूरी कहानी में हास्य रंग भरती पडोसन बिट्टू  की मम्मी है ∣ जो अपने बोलने और चलने के तरीके से लोगों का काफी मनोरंजन करती है ∣ जो शांति मिश्रा जी को हर बात बताती है कि उनके पति आज एलएडीटीवी लाएं, मनीष मल्होत्रा की डिजाइनर साड़ी लाएं किन्तु उनकी एक कमजोरी होती है  जहां भी उन्हें कोई मुफ्त की चीजें मिलती है वहां पर वो किसी भी हाल में लाइन लगने पहुंच ही जाती है ∣


इसमें सबसे पसंद आने वाला वो सीन है जब  पूरा घर ट्रेडिशनल होटल  में जाकर खाना खाता है ∣ और इसका सबसे भावुक वो पल  है जब संतोष शर्मा को दिल का दौरा पड़ने के कारण मिश्रा जी के परिवार के साथ दर्शकों की आंखों में आसूं आ जाते  है ∣ जहां पर बड़ा बेटा अनु अपने पिता की जगह लेकर घर की जिम्मेदारी को निभाता है ∣ और छोटा बेटा इस भागाम भाग के बीच अपने बड़े भाई के लिए पिता की चप्पल अपने संग लेकर अस्पताल जाता है ∣
और बड़ा बेटा जब उसे पहनता है 


गुल्लक एक मध्यमवर्गीय परिवार की छोटी छोटी खुशियां,   उनके किस्सों को लेकर इस सीरीज के माध्यम से हमारे पास आती है ∣ जो हमारे आस पास की ही कहानी है फर्क महज इतना है कि हमने इस पर कभी ध्यान ही नहीं दिया है ∣

अगर आप कुछ नया देखना चाहते हैं जो हम और आप से बहुत जुड़ा हुआ है ∣ तब हमें ये सीरीज जरूर देखनी चाहिए ∣ जिसमें हर एक पात्र हमें अपने आस पास हो रही घटनाओं को एक न ए तरीके से बताता है ∣ साथ ही समाज से जुड़े हुए उसे मिथक को तोड़ता है ∣ जो आज भी हमारे समाज में कहीं न कहीं मौजूद है ∣ 


इसके संवाद इसे काफी सजीवता प्रदान करते हैं ∣ इसकी डायलाॅग डिलीवरी बहुत अच्छे से की गयी है ∣ इसमें सभी पात्र ने अपनी भूमिका बहुत सजीवता के साथ निभाई है ∣





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