कैसी दिख रही हूँ अच्छी तो लग रही हूं न, ये रंग मुझ पर ठीक लग रहा है न, अब बोले भी कुछ
ये संवाद हम अपने आस पास अक्सर सुनते हैं ∣ जहां एक पत्नी अपने पति से अपने बारे में पूछ रही होती है कि उस पर ये रंग कैसा लग रहा है न , वो अच्छी लग रही है न, आज मैंने उस रंग का चयन किया है जिस रंग को मैं कब से पहनने का सोच रही थी ∣
आज हम भले ही हम खुद को आधुनिक इंसान समझते हैं ∣ जहां पर हम लोगों से ज्यादा अपनों की खुशी का ध्यान रखते है ∣
पर ये सारा दिखावटीपन तब दुनिया के सामने आता है जब हम अपने साथी को केवल इसलिए चिल्लाते है क्योंकि उसने जिस रंग के कपड़े पहने है ∣ वो रंग उसके स्कीन के रंग से मेल नहीं खाता ∣
आज क्यों न हम सब एक ऐसी सोच को अपनाएं जहां किसी के कपड़े और उसके रंग रूप से नहीं बल्कि उसकी काबिलियत और उसके व्यक्तित्व से उसकी पहचान हो ∣ उसे उस रंग के कपड़े पहनने का हक हो जो उसे पसंद हो न की दूसरे को ∣
###Why Not

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