भारत एक विविधता वाला देश है जहां पर अलग अलग धर्म के लोग निवास करते हैं जिसके कारण भारत संपूर्ण विश्व को अनेकता में एकता का संदेश देता है ∣
भारत की खोज में पंडित जवाहरलाल नेहरू कहते हैं
" कि भारत में अनेक धर्म और जाति के लोग निवास करते हैं जिनकी अपनी परंपरा और रीति रिवाज है किन्तु जब वो दूसरे देश जाते है तो वो भारत वासी ही कहलाते है "
उनका ये कथन हम सबको भारत की उस खूबसूरती की झलक दिखाता है हमें वो गीत याद दिलाता है सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा हमारा,
पर आज जब कुछ लोगों के द्वारा भारत की इस खूबसूरती को खराब करने की की कोशिश की जाती है कि भारत में अल्पसंख्यक खतरे में है ∣ तब भारत के संविधान में उनको
मिले अधिकार को जानना जरूरी हो जाता है∣
जब भारत में संविधान सभा होती थी तब उसमें से ही एक सभा में कुछ संविधान निर्माताओं ने इस बात पर चिंता जाहिर की थी भारत में अल्पसंख्यकों के लिए कोई ऐसा प्रावधान हो जो उनकी सुरक्षा को तो सुनिश्चित करे ही साथ ही साथ उनको धर्म ,संस्कृति की सुरक्षा की भी गारंटी दे तब भारत के संविधान में अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार और अनुच्छेद 29 के तहत संस्कृति शिक्षा के अधिकार को जोड़ा गया ∣
जिसका मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यको को बहुसंख्यक के साथ बराबरी दिलाना था न कि बहुसंख्यको से ज्यादा शक्तियां देना ∣
पर आज कुछ लोगों के द्वारा ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि अनुच्छेद 29 का अधिकार अल्पसंख्यकों ज्यादा शक्ति देने के लिए लाया गया है ∣
आज वर्तमान समय में हमें अपने संविधान को पढ़ने की बहुत ज्यादा जरूरत है जिसके माध्यम से हम गलत सही में फर्क समझ सकें ∣
Comments