बदलते दौर में वायु सेना में एएच 64 ई अपाचे विमान की प्रासंगिकता

 



किसी भी देश की सुरक्षा के लिए कुछ विशेष दल की आवश्यकता होती है जो उस देश में निवास  कर रहे लोगों की

सुरक्षा को सुनिश्चित कर सके साथ ही शत्रु देश को मुंह तोड़ जबाब दे सके ∣


जिसमें भारत देश भी एक सम्प्रभु वाला देश हुआ है जिसकी सेना पूरे विश्व में चौथा स्थान रखती है ∣  जिसने अपनी सेना को और भी मजबूत करने के लिए  विकसित देशों से आवश्यक रक्षा उपकरण खरीदें है जिसमें एक से बढकर एक रक्षा उपकरण शामिल हुए  हैं ∣

जिसने वायु  सेना की ताकत में  बढ़ोत्तरी की है  जिसमें से एक विमान एएच  64  ई अपाचे  है जिसको  अमेरिका से खरीदा गया है

जो की एम आई 35 हेलीकॉप्टर की जगह लेगें जिसके लिए भारत ने अमेरिका से 2018 में करार किया था 

ज़ो कि पठानकोट एयरबेस में शामिल किए जाएगें ∣

जिसकी खासियत पर अगर गौर करें तो जानेगें  कि अमेरिका का दो टर्बोशाफ्ट इंजन और चार ब्लेड वाला अटैक हेलीकॉप्टर है। 

यह हेलीकॉप्टर अपने आगे लगे सेंसर की मदद से रात में उड़ान  भर सकता है। इसकी पहली उड़ान 30 सितंबर 1975 में हुई थी। यह दुनिया में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाला आक्रमक विमान है।  इस विमान में आगे  से़ंसर लगा हुआ जिसकी मदद से ये रात में उड़ान भरता है ∣ ये पहाड़ियों  और घाटियों वाले इलाके पर दुश्मन को खोज निकालता है जो 280 प्रति घंटे उड़ान भर सकता है ये लगातार पौने 3 घंटे चल सकता है साथ ही ये एक मिनट में 128 लोगों पर सटीक हमला करने की क्षमता रखता है ∣

इसे दुश्मन का रडार भी आसानी से नहीं पकड़ सकता है ∣

भारतीय वायुसेना अपनी ताकत को बढ़lने के लिए लगातार नवाचार पर जोर दे रही है  जिसके लिए वो दूसरे देशों से करार करके न ए  न ए हेलीकॉप्टर और संयंत्र खरीद रही है

जिसमें केवल विमान खरीदी के लिए 35 फीसदी बजट  रखा गया ह है जिसका उद्देश्य मारक क्षमता में वृद्धि करना है ∣


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