वक्त की बंदिश में





अक्सर लोग निकल जाते हैं 

समय से भी आगे

एक न ए रास्ते की खोज में, 


 समय की बंदिश में

ऐसे बदल जाती है राह

जैसे पूर्व, पश्चिम मोड़ में, 

 

समय की पाबंदी में

रास्ते वहीं होते हैं पर अक्सर

उस रास्ते पर चलने वाले लोग 

बदल जाते हैं , 


  हर दिन होते वहीं घंटे

और रात - दिन

पर न जानें कैसे समय के उपयोग 

बदल जाते हैं ∣


समय आने पर अक्सर दोस्त बदल जाते हैं

जो खाते है कभी साथ कसमें

जीने मरने की , 

जो रास्ता होता है अपना कभी खास

अक्सर वो रास्ता कब अजनबी बन 

जाता जैसे मालूम ही नहीं चलता है, 

मौसम की तरह कब रिश्ते बदल जाते हैं

रेत पर लिखे नाम कभी टिकते है 

पत्थर पर लिखे नाम कभी मिटते है, 

जो नहीं मिटते कितनी कोशिश के बाद

भले अक्सर इस कोशिश में हम लोग मिट जाया करते हैं ∣

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