बचपन में हम सब सेल्फ स्टडी जरूर करते थे जिसका फायदा हमें त्वरित भले न मालूम चले, किन्तु कुछ समय बाद दिखने लगता था ∣
जिसमें हम कभी -कभी साहित्य को देखते थे तो कभी अपना मनपसंद विषय टीचर के पढ़ाने से पहले ही पढ़ लेते थे ∣
और कब हमारी रूचि हमारी अभिरुचि बन जाती थी
हमें मालूम ही नहीं चलाता था ∣ कुछ गणित को दिनभर करते रहते थे तो कुछ विज्ञान के ज्यादा प्रेमी थे तो एक दो प्रतिशत सामाजिक विज्ञान विषय भी कुछ लोगों का मनपसंद विषय होया करता था ∣ जिसमें वो भूगोल, इतिहास से लेकर नागरिक शास्त्र बड़े चाव से पढ़ा करते थे ∣ जैसे सामाजिक विज्ञान नहीं दुष्यंत की कोई गज़ल पढ़ रहे हो संस्कृत बहुत कम ही लोग खुद से पढ़ने का साहस करते थे पर जब पढ़ते थे तो वो उसमें कुछ नया शब्द ढूढ़ने का प्रयास जरूर करते थे ∣
Self study महज एक शब्द नहीं बल्कि खुद का बौद्धिक विकास करने का एक जरिया है जिसके माध्यम से हम अपने समय का सही उपयोग करते हैं ∣
आज समकालीन समय में जब हम सब की पढ़ाई कही पीछे छूट सी गयी है ∣ तो ऐसे में जरूरी हो गया है खुद से सेल्फ स्टडी करने का जिससे हो हमारा मस्तिष्क स्वास्थ्य और सीखे हम कुछ नया सा बढ़ाए अपना ज्ञान और करे अपने व्यक्तित्व का विकास और करे न ए विचार ग्रहण ∣
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