कोई भी काम जो हमें लगता है, कि हमें इसमें महारत हासिल करनी है ∣ जिसके आगे कोई भी न टिक पाएं ऐसा मील का पत्थर हमें होना है ∣ तो इसके लिए जरूरी है, कि हम उसके नियम से ज्यादा उसके नियमित होने पर जोर दे ∣ क्योंकि नियम अक्सर हमारे द्वारा बनाकर तोड़ दिए जाते हैं किन्तु नियमित क़ो अनियमित करना तब तक असम्भव होता है ∣ जब तक हम स्वयं उसमें ढिल न दे ∣
समय का पहिया बहुत तेजी से आगे बढ़कर
एक नया बदलाव अपने साथ ला रहा है ∣ जिसमें हम सब को खुद को कितना बदलना है बेहतर बनने के लिए ये सिर्फ और सिर्फ हम पर निर्भर करता है ∣
कल किसने देखा है, ये बात आज के समय में इतनी भी अनिश्चित सी नहीं लगती है क्योंकि जिसने अपने आज को बेहतर ढंग से जिया है उसने अपने कल को भी उतनी दूरदर्शिता के साथ देखा है ∣
आज 21 शताब्दी का सबसे बड़ा यथार्थ ये है, कि यहाँ जो दिखाई देता है वही अक्सर मिथ्या हो जाता है ओर जो छिपा हुआ होता मानों सीप में मोती समान वही जीवन का गूढ़ सत्य होता है ∣
नदियाँ, ऋतु और दिन, रात को भला कौन रोक पाया है उसके काम से फिर हम तो मनुष्य है
जो अगर चाहों किसी चीज को शिद्दत से तो वो उससे दूर हो जाएं ऐसा क्या सम्भव होता है ∣
जरा गौर फरमाएगा,मेरी इस बात का असफलता की अनिश्चितता में अक्सर सफलता का रहस्य छिपा हुआ होता है ∣
जो अक्सर असफलता के भवर में अपनी सफलता खोज निकालते हैं उनके जीवन का आलोक ( प्रकाश) सदैव सफलता के साथ जलता है ∣
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