विचार

 


धरती से देखों तो आसमां अच्छा लगता है ,आसमां से देखें तो ये धरती अच्छी लगती है ∣ अपने से बाहर सबकुछ अच्छा लगता है∣

यहा महज वाक्य नहीं अपितु जीवन का वहा सत्य से जिसे झूठ लाया नहीं जा सकता है ∣ 




हम सब  स्वयं को पसंद करने से कतराते है हम अक्सर दूसरों को देख उसकी तरह बनने की चाहत रखने लगते हैं ∣ और सोचते हैं, कि हमें उसकी तरह होना चाहिए जबकि ऐसा सोचते वक्त हम ये भूल जाया करते हैं, कि सामने वाला भी हमारे बारें में यही सोच रह होगा ∣ 

 हम में से कम ही लोग ऐसे होते हैं ∣ जिन्हें अपने आप से मोहब्बत होती है वरना ज्यादातर लोग अपने आप को सबसे से बदसूरत समझते हैं ∣ 

जिस कारण अक्सर हम में आत्मविश्वास की कमी हो जाती है ∣

मेरी बात पर जरा गौर फरमाइएगा हम में से ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जिसमें कमियाँ नही है किन्तु फिर भी वो अपने आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन को बेहतर कर रहा है ∣ क्योंकि उसे मालूम चल गया है यहीं जीवन है ,जहाँ पर लोग थोड़ी कमियाँ और थोड़े जुनून के साथ अपनी बेरंग जिंदगी में रंग भरते है ∣

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