लॉक डाउन का असर बच्चों की शिक्षा पर बना कहर

 


25 मार्च 2020 से लगा  लॉकडाउन ने इस तरह से तालाबंदी की शमा बांधी की आज 2021 माह अगस्त की 2 तारीक हो चुकी किन्तु  अभी तक बच्चे ये  अनुमान  नहीं  लगा  सकते हैं कि वो स्कूल कब जा सकेगें।

ऑनलाईन हुई शिक्षा के जहाँ क ई लाभ लोगों को देखने को मिलें तो वहीं इससे बच्चों को क ई तरह की परेशानी भी झेलनी पड़ी है । जिसमें  फ़ोन की गुणवत्ता की कमी,बेहतर बैटरी  का  अभाव , मेमरी स्पेस और इंटरनेट कनेक्शन  भी शामिल हैं।

तो वही  ऑनलाईन शिक्षा  का असर बच्चों में भी देखने को मिल रहा है जो बच्चे किसी कारण से इस माध्यम से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं ∣ उन बच्चों की लिखने की क्षमता से लेकर उनके याद करने की क्षमता भी बुरी तरह से प्रभावित हु ई है ।

जहाँ बच्चे अपनी कक्षा की किताब ही नहीं पढ़ पा रहे अन्य कक्षा की बात तो दूसरी है। यहाँ ये बात गौर करने वाली है कि बच्चों को मिला 'शिक्षा का अधिकार 'एक बार फिर इस महामारी के चलते  कहीं छिन सा गया और एक विशेष वर्ग के  पास ही बचा है ∣ 

क ई रिपोर्ट का हम अध्ययन करें तो हम जानेगें कि' सर्व शिक्षा अभियान' ने अभी तक जितनी प्रगति की थी बच्चों को स्कूल की तरफ मोड़ने की इस महामारी ने एक बार  फिर उन बच्चों को इस शिक्षा से काफी दूर फेंक दिया है ∣ जहाँ एक बार  फिर उन बच्चों की संंख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है जो कि बाल मजदूरी करने को विवश  हुए हैं ∣ 

तो वही लड़कियों पर इसका असर यहा हुआ है कि परिवार की आर्थिक हालात खराब होने से कही- कही उनकी पढ़ाई छुड़वा दी गयी है तो कही उनके बाल विवाह कर दिए गए    ∣ 


तमाम कोशिश के बावजूद एक बार फिर लैगिक समानता पर इस महामारी ने जो हमला किया है ∣ उसका असर बच्चों की शिक्षा पर इस कदर पड़ है कि अब लोगों को अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ रही है ∣


तब भी जहाँ ऑनलाईन शिक्षा का चलन इस महामारी के कारण ज्यादा देखने को मिल रहा है वहीं दूसरी तरफ  धरातल पर इसकी वास्तविकता कुछ और ही दिखाई दे रही है। आईसीएआई के मुताबिक़, भारत की 130 करोड़ की आबादी में से क़रीब 45 करोड़ लोगों के पास ही स्मार्टफ़ोन है.


तो वही   एक आकड़ों की माने तो भारत के 24 करोड़ शिक्षार्थियों में से 18,188 बच्चों पर किये गये इस सर्वे में यह भी सामने आया कि लगभग 80 फ़ीसदी बच्चों के पास लैपटॉप नहीं है ।  और लगभग 20 फ़ीसदी बच्चों के पास स्मार्टफ़ोन नहीं है। तो वहीं एनसीआरटी के मुताबिक़, भारत में 27 फ़ीसदी से ज़्यादा बच्चे, टीचर और घरवाले ऑनलाइन कक्षाएं लेने की प्रक्रिया में स्मार्टफ़ोन डिवाइस की कमी से जूझ रहे हैं ।


जहाँ एक तरफ देश में चुनाव से लेकर धार्मिक स्थलों पर जाने की पाबंदी लगती ओर हटती रही वहीं बच्चों की प्राथमिक स्कूल जाने से लेकर प्रायमरी, सेकेण्डरी स्कूल की पहुंच लगातार कम होती जा रही है।

अभी हाल ही मैंने एक  स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा से बात की जो कि भोपाल के एक प्रायवेट स्कूल में पढ़ती है। वो बताती है, कि उनके घर पर एक ही मोबाईल फोन हैं जो कि मम्मी के पास है उनके पिता का अभी दो साल पहले ही इन्तकाल हुआ है ।कहने को वो भोपाल के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ाई करती है   किन्तु वो भी ऑनलाईन पढ़ाई पसंद नहीं करती है ।  क्योंकि अब होमवर्क की सारी जिम्मेदारी उसके सिर पर तो है ही साथ ही साथ अब वो घर पर कैद सा हो गयी है। जिसके कारण उनकी खेल कूद की सभी गतिविधियां खत्म हो गयी है ∣ आगे  वो कहती है कि क ई बार उसकी क्लास छूट जाती  है ,जिसका कारण  क ई बार या तो फोन में इन्टरनेट धीरे चल रहा होता है या  घर पर फोन का न होना  होता  है ∣   अब उसे स्कूल जाने की जल्दी है, क्योंकि घर पर उसे कोई भी नहीं पढ़ता है ।और पहले स्कूल में  टीचर उसका होमवर्क करवा देती थी। जो भी समझा नही आता था वो मैडम से पूछ लेती थी किन्तु अब तो उसे ही सबकुछ करना पड़ता है ।

दूसरी कहानी एक आठवीं कक्षा की लड़की की है जिसका नाम  प्रिया है। जो पड़ने मैं तो बहुत होशियार है किन्तु जब से ऑनलाईन पढ़ाई हो गयी उसकी पढ़ाई छूट सी गयी है। क्योंकि उसके घर में एक ही स्मार्ट फोन हैं ,और वो भी बिना नेट के ही ज्यादा समय तक रहता है ,जो उसे वो बहुत कम ही पढ़ने को  मिलता है ।वो चाहती है, कि अब उसे पहले जैसे पढ़ाई करने का अवसर मिले।

हमारे आस पास  ऐसे बहुत से  उदाहरण हमें देखने को मिलेगें, ज़ो बच्चों के लिए ऑनलाईन पढ़ाई किस तरह से उनके लिए कहर बना  हैं ये स्पष्ट रूप से दिखाता है ।
कुछ बच्चों जहाँ स्मार्ट फोन न होने के कारण पढ़ाई से वंचित है, तो कुछ स्मार्ट फोन की उपलब्धता के बावजूद अब ऑनलाईन पढ़ाई से ऊब चुके हैं और अब चाहते हैं कि ऑफलाईन पढ़ाई करायी जाए   जिससे वो पहले की तरह पढ़ाई कर सके ।


आज हम सब को इस ओर गम्भीर विचार करने की जरूरत है कि उस देश में जहाँ गुरूकुल पद्धति से शिक्षा करायी जाती थी उस देश में बच्चों का ऑनलाईन पढ़ाया जाना क्या सही है ∣ बच्चे इस देश का भविष्य है उनके साथ हमें अब और खिलवाड़ नहीं करना चाहिए क्योंकि बच्चों का बौद्धिक और मानसिक विकास केवल ऑफलाईन की शिक्षा से ही सम्भव है ∣


अब हम सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी ये बनती है, कि सभी स्कूल में पढ़ाने वाले टीचर से लेकर सभी कर्मियों को वैक्सीनेशन तेजी से किया जाए साथ ही स्कूल में प्रबंधन के माध्यम से ऐसे  नियम बनाएं जाएं कि बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे । 

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