कितनी अजीब है न ये जिंदगी, जहाँ किसी की भी कोई गारंटी नहीं है ∣ आज हम जिसे मिल रहे हैं कल उसे फिर से देख पाएंगे की नहीं इसकी सूचना किसी को भी नहीं है ∣ और अगर मिल भी ग ए तो न जाने उसे किस हालात में मिलेगें हम इसकी खबर किसी को भी नहीं है∣
जिंदगी का कोई ठिकाना नहीं है ∣ आज
है वो हमारे साथ कल रहेगी की नहीं∣ इसलिए तो कहते हैं ,जब तक है इस इंसान दुनिया में तो सबसे हंस कर बोल ले कल किसी ने देखा ,हम रहे या वो नहीं∣
जब मिले इंसान तो भले हमें वो बिल्कुल न पसंद हो तब भी हम उसे खुशी से बात कर ले∣
ये अंहकार जब रावण को न बचा सका जिसकी सोने की लंका थी तो इस तुच्छ मनुष्य की भला क्या औकात है ∣
अमीर हो, तुम्हें सब कुछ आता, किन्तु तुम किसी की मदद करने को एहसान समझते हो तो अपनी इस भूल को सुधार लो ∣
क्योंकि
कितना भी अमीर इंसान हो उसे भी एक दिन इस दुनिया को छोड़कर मिट्टी में ही मिल जाना है∣ सिर्फ चार दिनों का सब का ठिकाना है ∣ इसलिए कद्र करें उनकी जो तुम्हे मिले है किस को खबर कब वो तुम से छिन ले ∣
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