आज जिस विषय पर बात करने वाली हुं अक्सर हम उस पर आकर चुप हो जाते हैं ये इतना गम्भीर होता है या विषय को समझने वाले ही इतने गम्भीर होते हैं कि उसका नाम आने से पहले ही उस पर अपनी चुपी साध लेना ज्यादा उचित समझते हैं ये समझना थोड़ा मुश्किल है?
किन्तु फिर भी आज इस विषय पर लिखने का साहस जुटा पायी हुं उम्मीद है जिनके लिए लिखा हैं वो लोग इसे समझे,
'Periods poverty' इस से आप सब अवगत होगें और जो इससे अवगत नहीं है उनके लिए बताना चाहुंगी मासिक धर्म के दौरान periods से जुड़ी हुई चीजों को न खरीद पाना जैसे sanitary napkin जो भले सामान्य लगे किन्तु गाँव , कस्बे में आज भी लड़कियों इसके उपयोग से वंचित है और अब जब स्कूल बंद है तो उन लड़कियों को स्कूल से भी sanitary napkin नहीं मिल पा रहे हैं जो हम सब
के लिए भले अचिंतीयनीय लगे किन्तु यहाँ स्वच्छता की दृष्टि से गम्भीर परेशानी है
कल ही World hand hygiene day था जो दिवस बाकी दिवस की तरह प्रकाश में भले ही न आया हो किन्तु आलोक को क्या भला कोई मिटा पाया है ?कि इस गूढ़ सत्य को मिटा सके कि देश में आज भी ज्यादातर महिलाएं periods poverty से जूझ रही है
सरकार का ध्यान भले केवल महिला दिवस पर जाता है किन्तु हर महिला, हर लड़की हर माह इस दर्द से गुजरती है ये बात किसी से छुपी नहीं है किन्तु फिर ये सिर्फ महिलाओं की परेशानी से कहकर हम इस से अपना पीछा नहीं छुटा सकते
आज जरूरत है कि हम अपने घर पर ही इसका एक सर्वे करे कि हमारे घर की महिलाएं उन दिनों में अपनी सेहत का ध्यान किस तरीके से रखती है ऐसे तो नही कि उस समय भी हम अपने काम करने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि उनके हाल चाल लेना भी हम मुनसिब नहीं समझते.
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