सुबह से शाम घर का काम करते हुए निशा बहुत थक गयी है और उसे अहसास हो रहा है कि उसे अब थोड़ा आराम करने की जरूरत है
तभी कि बाहर से आवाज आयी पोस्टमैन.
निशा थोड़ा सांस लेती हुयी अपने साड़ी के पलू को सही करते हुए बाल क़ो हाथ से ही अच्छा करके
बाहर गयी कि कुरियर वाले न कहा कि रामपुर से खत आया है
निशा घबरायी और बोली सब कुछ ठीक है न निशा को याद आया कि
एक साल पहले उसने स्कूल में पढ़ाने के लिए परीक्षा दी है जिसे वो प्रथम आयी है जिसके चलते उसने रामपुर के एक स्कूल में आवेदन किया है टीचर के लिए, निशा को लगा कि जिस बात को वो छुपा रही थी वो आज सामने न आ जाए निशा का पति मनोज वैसे तो बहुत नेक दिल इंसान है व़ो निशा की पढ़ाई के लिए हमेशा उसे प्रोत्साहित करता रहता है जिसके चलते निशा ने कालेज की पढ़ाई ससुराल में की क्यों कि वो खुद एक निजी कालेज का राजनीति विषय का अध्यपाक है इसलिए उसने हमेशा उसे पढ़ाई के हमेशा आगे किया किन्तु परिवार में हर दिन इस बात के लिए निशा को ताने दिए जाते हैं कि आठ साल में उसने अभी तक उसके माँ बाप को पोता पोती के सुख से वंचित रखा और अब जब वो माँ बनने वाली है तो वो कैसे बच्चे को छोड़ दूसरा काम करेगीः
मनोज के माता पिता शिक्षित है किन्तु व़ो बहु को घर के अंदर देखना ज्यादा पसंद करते हैं ये बात और है कि वो अक्सर पडोस में गर्व करते हुए ये कहते हैं कि उनकी बहु कालेज करी हुई लड़की है
निशा सोच में
खत लेकर अंदर गयी व़ो खत को पढ़ने वाली थी कि उसके सास ससुर मंदिर से वापस लौट आए और उसके हाथ में रखे खत के बारे में पूछा ये क्या है? बहु निशा बस इतना कह पायी रामपुर से आया है और उसकी आंखे भर आयी.
सास ने कहा निशा पढ़ तो लो इसमें क्या लिखा है और वो अपने कमरे में चली गयी ससुर टीवी देखने चले गए
निशा ने हाथ में खत लिया और उसके लिफाफे को बड़ी सावधानी से फटाते हुए देखा कि वो एक जाब का असाइंमेंट लेटर है टीचर के लिए जिसके लिए उसने एक साल पहले आवेदन किया था
निशा ने बीकॉम ही किया है उसकी पढ़ाने में बहुत रूचि है उसका सपना 11 वी में गणित का विषय लेने का था लेकिन गाँव में वो विषय नही था.
निशा इस उलझन में पड़ गयी, है कि व़ो इसे कर पाएंगी की नहीं क्योंकि अब घर के काम से उसे एक मिनट भी फुर्सत नहीं मिलती कि वो कुछ करे और उसके पति मनोज को हमेशा उसे शिकायत रहती है कि वो जब देखों काम में ही लगी रहती है उसको समय ही नहीं देती है
निशा को सास की वो बात याद आ गयी जो हमेशा उसके लिए एक गहरे जख्म की तरह है कि पढ़ाई करके क्या डाक्टर बनना है पालना तो बच्चे ही है और फिर निशा खत रखा और खाना बनाने अंदर चली गयी
और उसके जख्म फिर हरे हो ग ए.
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