कुछ लोग सपने देखते रहते हैं तो कुछ अपने सपने ही अपनी दुनिया को बना लेते हैं जिनके हौसले पत्थर से भी ज्यादा मजबूत होते हैं जो अपनी बात इस लहजे में रखते हैं कि उनको देखकर ही ये मालूम किया जा सकता है कि ये इंसान क्या है.
जिसके लिए कोई उम्र नहीं होती है जिंदगी में कुछ लोगों को उनकी परिस्थिति ही परिपक्व बना देती है तो कुछ लोग बड़े होकर भी अपरिपक्व रह जाते हैं दोनों में अंतर महज इतना होता है कुछ अपनी जिंदगी में आयी विषम परिस्थितियों से सीख जाते हैं जिनके लिए उनके हौसले ही लोगों की दुआ बन जाते हैं.
तो कुछ लोग बड़े होकर भी छोटे रह जाते हैं.
जीवन में सबसे ज्यादा वो लोग काम आते हैं जो हमें जिंदगी जीने के सही मायने बताते हैं.
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