हम में से क ई लोग अक्सर अपना परिचय देते वक्त अपने से ज्यादा अपनी वस्तु का परिचय देते हैं जिसकी परिणति ये होती है कि एक समय के बाद ऐसे लोगों की बात सुनना बहुत ऊबाउ सा लगता है.
वहीं दूसरी तरफ वे लोग होते हैं जिनके पास बहुत होने के बावजूद वो किसी के रंग में भी ढल जाते हैं जिनको देखकर ये पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि व्यक्ति सच में साधन हीन है या बनने की कोशिश कर रहा है.
इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि आपका कोई दोस्त कार से आने जाने वाला हो और आप निजी बस से जिसमें चढ़ने वाला व्यक्ति इतना आम होता है कि अक्सर उसके सामने से बस निकल जाती है और वो हाथ ही दिखाता रह जाता है ऐसे दोस्त के सामने अगर कार वाला दोस्त अपनी कार के जलवे दिखाए और अपनी ही तारीफ करते रहे तो कार कम दिखावा ज्यादा लगता है.
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