वो वर्ग के लोग जिनकी आयु 18 वर्ष से कम है वो बाल कहलाते हैं
भारत में बाल संरक्षण के लिए जे जे एक्ट बना है जो भारत के कुल 545 जिले में लागू है
इसमें कुछ महत्वपूर्ण धारा और उनका उल्लेख कुछ इस तरह से है
धारा 74 बच्चों की रिपोटिंग ऐसे करना जिसे की उसकी व्यक्ति गत जानकारी सामने आ जाए
अपराध की श्रेणी में आता है
धारा 75 बच्चों को कही भी रास्ते या किसी अनजान स्थान पर छोड़ देना.
धारा 76 किसी बालक से भीख मंगवाना.
धारा 77 बच्चे की मदद से मादक पदार्थ बेचना.
आज 80 से 90 प्रतिशत बच्चों का शोषण उनके परिवार के किसी सदस्य या जन पहचान व्यक्ति के द्वारा ही किया जाता है जिसके चलते बच्चे इसकी शिकायत किसी से नहीं कर पाते ऐसे अपराध खत्म करने के लिए हम सब की ये जिम्मेदारी बनती है कि हम ऐसे बच्चों की मदद करे .
वैसे तो भारत में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए Protection of children from sexual offences (POCSO) एक्ट बना है जिसमें बच्चों के साथ हुए अपराध की जांच की जाती है इसका अलग से न्याय लय होता है जिसका काम सबसे पहले बच्चों की सुरक्षा करना और उन्हें ये आश्वासन दिलाना की वो अब सुरक्षित है और फिर अपराधी के बारे में पूछना होता है.
(POCSO) act की धारा 21 के अनुसार अगर बच्चे के साथ किए गए अपराध की रिपोटिंग नहीं की जाती तो वो भी अपराध है.
Child labour act
जिसमें 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ऐसी जगह पर काम करना जहाँ उनकी जान को खतरा है ये अपराध के अंतर्गत आता है.
भारत के संविधान में मौलिक अधिकार के अंतगर्त अनुच्छेद की धारा 23 में शोषण के विरुद्ध अधिकार प्राप्त है अगर उसके साथ शोषण होता है ये उसे काम कराया जाता है और वेतन कम दिया जाता है तो ये अपराध की श्रेणी में आएगा.
आज समकालीन समय में बच्चों के मूल अधिकार ही उन्हें नहीं मिल पा रहे हैं जहां एक ओर कोरोना प्रभाव के चलते उनकी पढ़ाई छूट गयी है तो वहीं उनके स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है.
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