आज भी मैं किताब से बेहतर पढ़ने का तरीका कोई दूसरा नहीं मानती
हूं क्योंकि जब भी हम इसे पढ़ते हैं तो हम विषय के अलावा भी कई
जानकारी लेते हैं
उदाहरण के लिए अगर मुझे कोई राजधानी मालूम करना है तो में कोई एनसीआरटी की किताब देखती हूँ तो मुझे उसके अलावा भी कोई चीजे मिल जाती है और मैं उन्हे भी पढ़ती हुं और कुछ समय तक लगातार पढ़ती ही जाती हूं जिस कारण से मेरे पहले के भी कोई संदेह जो किसी चीज को लेकर थे वो खत्म हो जाते हैं.
आज के समय
हमारे पास गुगल उपलब्ध है जो हमें अनगिनत जानकारी प्रदान कर सकता है लेकिन तब भी हम रोज उसमें कितनी नयी ऐसी चीज देखते है शायद बहुत काम क्योंकि कहीं न कहीं हम आज उस पर बहुत अधिक निर्भर हो गऐ जो कि सही नहीं कहा जा सकता, है.
अगर हमें अपने काम में पकड़ मजबूत करनी है तो हमें गूगल से भी तेज होना होगा तभी हमारा जीवन सार्थक होगा.
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