बाल मजदूरी


आज  भी कितने ऐसे बच्चे हैं जिनके पास किताब की जगह हाथ में पेपर बेचने को 

है ऐसे बच्चे कि नियति भी क्या है? 

जो सड़क पर अखबार बेच रहे होते हैं व़ो अपनी खबर से ही अनजान होते हैं वो छोटे बच्चे जो मोची का काम कर रहे होते हैं दूसरे के जूते चमक रहे होते हैं उनकी अपनी जिंदगी में कोई चमक नहीं होती है.

और इसे अलग कुछ बच्चे होटल में चाय दे रहे होते हैं स्टेशन में समोसे बेच रहे होते हैं.

अनुच्छेद 24 में चौदह वर्ष  से कम आयु के बच्चे को किसी भी जगह पर काम करने को नहीं लगाया जा सकता है . 

ये अधिकार नागरिकों को अनुच्छेद 23 शोषण के विरुद्ध अधिकार के तहत मिले हैं.

" लेकिन  अफ़सोस कि बात है

बाल मजदूरी विषय को देखते समय ऐसे बच्चे के जीवन में दीपक तले अंधेरा नज़र आता है ".


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